नई लक्ष्मी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
जगजननी, जगदम्बे, त्रिभुवन तारणी।
तुम्ही हो विश्व विधात्री, महिमा अमित वरणी।।
सुन्दर स्वरूपे, सुरेशवरी।
सुख, शांति निदान, भक्तिभाव भारी।।
जय जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
सुन्दररूपे ध्वजा बिराजे, त्रिपुरारि संहारिणी।
तुम ही शुभदायिनी, सुखकारिणी, सुखकारिणी।।
लक्ष्मी जी की आरती जो कोई नर गावे।
उर आनंद समाता, पाप उतर जावे।।
धन और यश धरती पर जब जगमगाते।
तापत दुखी वस्त्र, तुम ताज धरती पर आते।।
जय जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
मातरनिवासी, समस्त जगत में।
सूर्य चंद्रमा द्वारा, तुम्हारी पूजा होती।।
धूप दीप नैवेद्य, चढ़त चितचोर।
माँ, तुम्हरे दरबार में, मिलत भक्त हरसे और जोर।।
जय जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
विष्णु चित भवानी धूपदीप विलीन।
सेवत नर नरियन कहत नरधीर धीर।।
दूरदर्शन मोहिनी, अमित विक्रमी।
मोहित करत मानव जगमग सुखकारिणी।।
जय जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
तुम ही हो विद्या, तुम ही हो धन।
तुम ही हो भगवती, सर्वजगजननी सुखदान।।
भवजल तारिणी, माँ शुभफल प्रदायिनी।
जन्म-जन्म के दुख नष्ट करत भक्तों की मन की इच्छाएं पूर्ण करते।।
जय जय लक्ष्मी माता, जय जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।